हिंद महासागर कभी भारत की रणनीतिक ताकत का प्रतीक माना जाता था, लेकिन अब इस समुद्र में एक और बड़ी शक्ति अपनी मौजूदगी लगातार बढ़ा रही है. अफ्रीका के तटों से लेकर दक्षिण एशिया तक, चीनी युद्धपोतों और बंदरगाहों का जाल धीरे-धीरे फैलता जा रहा है. ऐसे में यहां दो बातें निकलकर सामने आती हैं कि चीन कितने देशों में नेवल बेस बना चुका है, और यह भारत की सुरक्षा के लिए कितना बड़ा खतरा बन सकता है. चलिए समझते हैं.
चीन कैसे बढ़ा रहा है अपनी नौसैनिक ताकत?
पिछले एक दशक में चीन ने अपनी नौसेना को अभूतपूर्व रूप से मजबूत किया है. चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी नेवी अब सिर्फ अपने तटों तक सीमित नहीं रही, बल्कि वह खुले समुद्रों में स्थायी मौजूदगी बनाने की रणनीति पर काम कर रही है. इसी रणनीति के तहत चीन ने अफ्रीका और हिंद महासागर क्षेत्र को खास तौर पर चुना है.
दुनिया में चीन के कितने नेवल बेस हैं?
फैक्ट के तौर पर देखें तो चीन का फिलहाल केवल एक आधिकारिक विदेशी सैन्य नेवल बेस है, जो अफ्रीका के जिबूती देश में स्थित है. यह बेस वर्ष 2017 में शुरू किया गया था. जिबूती का यह अड्डा लाल सागर और हिंद महासागर के बेहद अहम समुद्री रास्तों के पास स्थित है, जहां से वैश्विक व्यापार का बड़ा हिस्सा गुजरता है.
हालांकि चीन ने कई अन्य देशों में बंदरगाह और लॉजिस्टिक सुविधाएं विकसित की हैं, लेकिन उन्हें औपचारिक रूप से सैन्य नेवल बेस नहीं कहा जाता है फिर भी, ये बंदरगाह जरूरत पड़ने पर चीनी नौसेना के लिए इस्तेमाल किए जा सकते हैं.
अफ्रीका में बंदरगाहों का बढ़ता नेटवर्क
सैटेलाइट तस्वीरों और अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों के अनुसार चीन ने अफ्रीका के करीब 32 देशों में अपने युद्धपोतों के लिए बंदरगाहों और लॉजिस्टिक सुविधाओं का नेटवर्क तैयार किया है. नाइजीरिया का लेक्की पोर्ट, केन्या का मोम्बासा, कैमरून का क्रिबी और इक्वेटोरियल गिनी जैसे तटीय इलाकों में चीनी कंपनियों की मजबूत मौजूदगी देखी गई है. इनमें से कई बंदरगाह चीनी सरकारी कंपनियों द्वारा संचालित किए जा रहे हैं.
स्ट्रिंग ऑफ पर्ल्स रणनीति क्या है?
चीन की इस पूरी योजना को स्ट्रिंग ऑफ पर्ल्स रणनीति कहा जाता है. इसके तहत चीन हिंद महासागर के चारों ओर ऐसे बंदरगाह और ठिकाने विकसित करता है, जो जरूरत पड़ने पर सैन्य उपयोग में लाए जा सकें. इसमें पाकिस्तान का ग्वादर पोर्ट, श्रीलंका का हंबनटोटा पोर्ट और कंबोडिया का रीम नेवल बेस प्रमुख माने जाते हैं.
हिंद महासागर में चीन की बढ़ती मौजूदगी
आज हालात यह हैं कि चीन के सात से आठ युद्धपोत, जिनमें पनडुब्बियां और जासूसी जहाज भी शामिल होते हैं, लगभग स्थायी रूप से हिंद महासागर क्षेत्र में गश्त कर रहे हैं. चीनी नौसेना अरब सागर के साथ-साथ बंगाल की खाड़ी में भी सक्रिय है. इससे भारत को तीन दिशाओं से चीनी नौसैनिक गतिविधियों का सामना करना पड़ रहा है.
भारत के लिए कितना बड़ा खतरा?
भारत के लिए सबसे बड़ी चिंता उसकी समुद्री व्यापार लाइनों की सुरक्षा है. भारत का बड़ा हिस्सा तेल, गैस और व्यापारिक सामान समुद्री रास्तों से आता है. यदि किसी संकट की स्थिति में चीन इन रास्तों पर दबाव बनाता है, तो भारत की आर्थिक और सैन्य रणनीति प्रभावित हो सकती है. इसके अलावा चीन-पाकिस्तान की नजदीकी भारत की सुरक्षा चिंताओं को और बढ़ा देती है.
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