मर्दानी-3 का प्रमोशन निकला दिल्ली से 800 लोगों के लापता होने का केस, ऐसे करना कितना बड़ा गुनाह?

Mardaani 3 Promotion Controversy: हाल ही में सोशल मीडिया पर ऐसा दावा किया जा रहा है कि सिर्फ 15 दिनों के अंदर दिल्ली से 800 से ज्यादा लोग लापता हो गए हैं. इस तरह के आंकड़े तेजी से फैले. इसके बाद माता-पिता, यात्री और राजधानी के निवासियों में डर फैल गया. हालांकि जब दिल्ली पुलिस ने दखल दिया तो एक अलग ही तस्वीर सामने आई. ऐसा कहा जा रहा है कि यह कुछ और नहीं बल्कि मर्दानी 3 फिल्म की पब्लिसिटी थी. आइए जानते हैं कि इस तरह की खबरों को फैलाना कितना बड़ा गुनाह है. 

क्या दावा किया गया था 

दरअसल वायरल पोस्ट के मुताबिक जनवरी की शुरुआत में दिल्ली में 807 लोगों के लापता होने की सूचना दी गई थी. इसे एक बड़ी अपराध लहर के तौर पर देखा जा रहा था. दिल्ली पुलिस ने बाद में है साफ किया कि यह संख्या पुराने और संचयी डेटा थे और इन्हें बिना किसी संदर्भ के पेश किया गया था. यह आंकड़े नए या फिर अचानक लापता होने का कोई भी प्रमाण नहीं रखते और कथित तौर पर दहशत फैलाने के लिए सनसनीखेज तरीके से इस्तेमाल किए गए थे.

पुलिस ने इस घटना को पेड प्रमोशन का मामला बताया, जो कथित तौर पर अपराध और लापता व्यक्तियों पर केंद्रित फिल्म मर्दानी 3 के पब्लिसिटी अभियान से जुड़ा हुआ था. 

क्यों है यह एक गंभीर अपराध 

झूठी जानकारी का इस्तेमाल करके सार्वजनिक दहशत फैलाना सार्वजनिक व्यवस्था के लिए सीधा खतरा माना जाता है. कानून प्रवर्तन एजेंसी इस बात पर जोर देती है कि जब डर फैलता है तो इससे अराजकता, भीड़ द्वारा हिंसा और संस्थानों में विश्वास की कमी हो सकती है. 

लागू होने वाले कानूनी प्रावधान 

अगर यह साबित हो जाता है कि व्यक्तियों या फिर एजेंसियों ने जानबूझकर इस जानकारी को फैलाया है तो कई कानूनी धाराएं लगाई जा सकती हैं.  इसमें सार्वजनिक शांति भंग करने के लिए बीएनएस की धारा 353 लगाई जा सकती है. इस धारा के अंतर्गत 3 साल की कैद, जुर्माना या फिर दोनों सजा दी जा सकती हैं. इसके अलावा भ्रामक जानकारी फैलाने के लिए बीएनएस की धारा 197 भी लगाई जा सकती है. इसके तहत 3 से 5 साल की कैद हो सकती है. इतना ही नहीं बल्कि यह दावे ऑनलाइन वायरल हुए हैं इस वजह से गलत जानकारी, पहचान की चोरी या फिर डिजिटल धोखाधड़ी से जुड़े आईटी कानून के तहत भी कार्रवाई की जा सकती है.

पुलिस जांच और मौजूदा स्थिति 

दिल्ली पुलिस की साइबर सेल ने डिजिटल सबूत, इनफ्लुएंसर पेमेंट्स और प्रमोशन लीड्स की जांच शुरू कर दी है. ऐसा पता लगाया जा रहा है कि इन दावों को किसने और क्यों फैलाया है. अधिकारियों ने साफ चेतावनी दी है कि अगर कोई व्यक्ति या फिर कंपनी फायदे के लिए डर फैलाने कि दोषी पाई जाती है तो उसे बख्शा नहीं जाएगा.

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