Missing Children India: लापता बच्चों का मुद्दा भारत के शहरी केंद्रों के सामने एक गंभीर सामाजिक चुनौती में से एक बना हुआ है. नेशनल क्राईम रिकॉर्ड्स ब्यूरो के डाटा और हाल के पुलिस रिकॉर्ड्स के मुताबिक दिल्ली में देश में लगातार सबसे ज्यादा बच्चे लापता होने की रिपोर्ट दर्ज की जाती है. पुलिस द्वारा नियमित रिकवरी ड्राइव के बावजूद भी मामलों की भारी संख्या राष्ट्रीय राजधानी को इस गंभीर सूची में सबसे ऊपर रखती है.
सबसे ज्यादा प्रभावित शहर
दिल्ली में साल दर साल सबसे ज्यादा बच्चे लापता होने के मामले दर्ज किया जा रहे हैं. अकेले 2025 में ही राजधानी में लगभग 5717 नाबालिगों के लापता होने की रिपोर्ट दर्ज की गई. यह मुद्दा जनवरी 2026 में फिर से चर्चा में आया जब रिपोर्ट में यह दावा किया गया कि महीने के पहले 15 दिनों में ही 800 से ज्यादा लोग लापता हो गए. हालांकि बाद में दिल्ली पुलिस ने यह भी साफ किया कि इनमें से कई लोगों को ढूंढ लिया गया है.
दक्षिण में बढ़ती चिंता
बेंगलुरु कर्नाटक में सबसे ज्यादा लापता बच्चों के मामलों वाला शहर बन चुका है. 2020 और 2024 के बीच पूरे राज्य में लगभग 14,878 बच्चे लापता हो गए. इसमें एक बड़ा हिस्सा बेंगलुरु से था. आंकड़ों के मुताबिक 1336 बच्चों का अभी भी पता नहीं लग पाया है. इस वजह से गंभीर चिंताएं बढ़ चुकी हैं. तेजी से शहरीकरण, प्रवासी परिवारों का आना और निगरानी प्रणालियों में कमी की वजह से शहर में इस तरह की परेशानी देखने को मिल रही है.
मुंबई के मामलों में बढ़ोतरी
मुंबई में भी चिंताजनक रुझान देखने को मिल रहे हैं. रिपोर्ट्स के मुताबिक फरवरी 2026 की शुरुआत में सिर्फ 36 घंटे के अंदर शहर के अलग-अलग हिस्सों से 12 बच्चे लापता हो गए. हालांकि ऐसे कई मामलों में बच्चे घर से भाग जाते हैं. मुंबई में झुग्गियां, रेलवे स्टेशन और भीड़भाड़ वाली सार्वजनिक जगहें अक्सर जोखिम वाले क्षेत्र के रूप में सामने आ रही हैं.
कौन सबसे ज्यादा खतरे में
डेटा से ऐसा पता चलता है कि लापता बच्चों के मामलों में लगभग 70% से 72% लड़कियां होती हैं. ज्यादातर मामलों में 12 से 18 साल की उम्र के टीनएजर्स शामिल होते हैं. यह उम्र का ऐसा ग्रुप होता है जो इमोशनल स्ट्रेस, मैनिपुलेशन और शोषण के प्रति खास तौर पर कमजोर होता है. रिकॉर्ड्स बताते हैं कि कई लड़कियां भागने या फिर नौकरी और शादी के झूठे वादों की वजह से लापता होती हैं, जबकि कई ट्रैफिकिंग नेटवर्क का शिकार हो जाती हैं.
ये भी पढ़ें: नितिन नवीन को मिला टाइप-8 सरकारी बंगला, जानें कितनी तरह के होते हैं सरकारी आवास?


